कॉर्पोरेट संगठन संरचना

MIL के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की अध्यक्षता चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) करते हैं। अभी MIL बोर्ड में CMD समेत 4 पूर्णकालिक डायरेक्टर और 3 अन्य डायरेक्टर शामिल हैं। ये डायरेक्टर ह्यूमन रिसोर्स, ऑपरेशन्स और फाइनेंस से जुड़े कामों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। बोर्ड में सरकार द्वारा नॉमिनेट किया गया एक डायरेक्टर भी होता है।

हमारी विरासत

सटीक। घातक। भरोसेमंद।

1801 कोलकाता के कॉसिपुर में गन कैरिज एजेंसी (वर्तमान में गन एंड शेल फैक्टरी, कॉसिपुर) की स्थापना हुई और उत्पादन 18 मार्च, 1802 से प्रारंभ हुआ।

1801 कोलकाता के कॉसिपुर में गन कैरिज एजेंसी (वर्तमान में गन एंड शेल फैक्टरी, कॉसिपुर) की स्थापना हुई और उत्पादन 18 मार्च, 1802 से प्रारंभ हुआ।

1869 एम्युनिशन फैक्टरी खड़की 16 दिसंबर 1869 को लघु शस्त्र निर्माण इकाई के रूप में अस्तित्व में आई।

1869 एम्युनिशन फैक्टरी खड़की 16 दिसंबर 1869 को लघु शस्त्र निर्माण इकाई के रूप में अस्तित्व में आई।

1904 नीलगिरि, तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित कॉर्डाइट फैक्टरी, अरुवनकाडु की स्थापना वर्ष 1904 में हुई।

1904 नीलगिरि, तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित कॉर्डाइट फैक्टरी, अरुवनकाडु की स्थापना वर्ष 1904 में हुई।

1940 हाई एक्सप्लोसिव्स फैक्टरी, खड़की, पुणे का शिलान्यास 11 जनवरी 1940 को हुआ और उत्पादन 1942 से प्रारंभ हुआ।

1940 हाई एक्सप्लोसिव्स फैक्टरी, खड़की, पुणे का शिलान्यास 11 जनवरी 1940 को हुआ और उत्पादन 1942 से प्रारंभ हुआ।

1942 आयुध निर्माणी खमरिया की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1943 में मित्र सेनाओं की गोला-बारूद आवश्यकता पूरी करने के लिए ईस्टर्न ग्रुप प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में की गई।

1942 आयुध निर्माणी खमरिया की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1943 में मित्र सेनाओं की गोला-बारूद आवश्यकता पूरी करने के लिए ईस्टर्न ग्रुप प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में की गई।

1964 आयुध निर्माणी चांदा परियोजना वर्ष 1964 में स्वीकृत हुई और प्रारंभिक उत्पादन 1970 में प्रारंभ हुआ।

1964 आयुध निर्माणी चांदा परियोजना वर्ष 1964 में स्वीकृत हुई और प्रारंभिक उत्पादन 1970 में प्रारंभ हुआ।

1964 ओएफवी की स्थापना 1964 में चीनी आक्रमण के तुरंत बाद मुख्य रूप से 7.62 मिमी गोला-बारूद के निर्माण के लिए की गई, ताकि 0.303 इंच कारतूसों का स्थान लिया जा सके, जो तब तक भारतीय सेना का प्राथमिक गोला-बारूद था।

1964 ओएफवी की स्थापना 1964 में चीनी आक्रमण के तुरंत बाद मुख्य रूप से 7.62 मिमी गोला-बारूद के निर्माण के लिए की गई, ताकि 0.303 इंच कारतूसों का स्थान लिया जा सके, जो तब तक भारतीय सेना का प्राथमिक गोला-बारूद था।

1980 इस कारखाने की स्थापना प्रारंभ में 1980 के दशक के उत्तरार्ध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की एक इकाई के रूप में अन्य सरकारी रक्षा एजेंसियों और कुछ विदेशी साझेदारों के सहयोग से हुई। उत्पाद का पूर्ण विकास पूरा होने के बाद कारखाना आयुध निर्माणी बोर्ड को सौंप दिया गया।

1980 इस कारखाने की स्थापना प्रारंभ में 1980 के दशक के उत्तरार्ध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की एक इकाई के रूप में अन्य सरकारी रक्षा एजेंसियों और कुछ विदेशी साझेदारों के सहयोग से हुई। उत्पाद का पूर्ण विकास पूरा होने के बाद कारखाना आयुध निर्माणी बोर्ड को सौंप दिया गया।

1984 आयुध निर्माणी बड़माल — इस कारखाने का शिलान्यास 29 अक्टूबर 1984 को रखा गया।

1984 आयुध निर्माणी बड़माल — इस कारखाने का शिलान्यास 29 अक्टूबर 1984 को रखा गया।

2001 आयुध निर्माणी नालंदा परियोजना 29.11.2001 को इस उद्देश्य से स्वीकृत हुई कि 155 मिमी आर्टिलरी गन के लिए बाई-मॉड्यूलर प्रोपेलेंट निर्माण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक स्थापित की जाए।

2001 आयुध निर्माणी नालंदा परियोजना 29.11.2001 को इस उद्देश्य से स्वीकृत हुई कि 155 मिमी आर्टिलरी गन के लिए बाई-मॉड्यूलर प्रोपेलेंट निर्माण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक स्थापित की जाए।

2021 एमआईएल की स्थापना 1 अक्टूबर 2021 को हुई और इसने अपना व्यावसायिक कार्य प्रारंभ किया।

2021 एमआईएल की स्थापना 1 अक्टूबर 2021 को हुई और इसने अपना व्यावसायिक कार्य प्रारंभ किया।