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म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड

भारत सरकार का उद्यम

गोला-बारूद के भविष्य को बदलना
गोला-बारूद के भविष्य को बदलना

म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड [MIL] भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम [CPSE] है। MIL भारत का सबसे बड़ा निर्माता और मार्केट लीडर है, जो सेना, नौसेना, वायु सेना एवं अर्ध-सैन्य बलों के लिए गोला-बारूद एवं विस्फोटकों की व्यापक श्रृंखला के उत्पादन, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास तथा विपणन में संलग्न है। पुणे (भारत) स्थित अपने कॉर्पोरेट कार्यालय के साथ, MIL देश भर में स्थित अपनी 12 अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों में लगभग 25,000 कुशल कर्मचारियों को रोजगार देता है। इन कारखानों के पास छोटे, मध्यम एवं उच्च कैलिबर गोला-बारूद, मोर्टार, रॉकेट, हैंड ग्रेनेड आदि के उत्पादन का सिद्ध एकीकृत आधार है, तथा 150 से अधिक वर्षों से इनीशिएटरी कंपोज़िशन, प्रोपेलेंट और उच्च विस्फोटकों का इन-हाउस निर्माण किया जा रहा है।

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समाचार और मुख्य बातें

मीडिया कार्यक्रम और समाचार

म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड – तीसरा स्थापना दिवस – अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एमआईएल के डेस्क से
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पुणे स्थित डीपीएसयू ने केंद्र के अभियान के तहत 258 टन स्क्रैप का निपटान किया
पुणे स्थित डीपीएसयू ने केंद्र के अभियान के तहत 258 टन स्क्रैप का निपटान किया पुणे स्थित डीपीएसयू ने केंद्र के अभियान के तहत 258 टन स्क्रैप का निपटान किया के बारे में और पढ़ें (JPG, 67.07 KB)

हमारे उत्पाद

गोला बारूद को सशक्त बनाना

हमारी इकाइयाँ

गोला बारूद को सशक्त बनाना

हमारी विरासत

सटीक। घातक। भरोसेमंद।

1801 कोलकाता के कॉसिपुर में गन कैरिज एजेंसी (वर्तमान में गन एंड शेल फैक्टरी, कॉसिपुर) की स्थापना हुई और उत्पादन 18 मार्च, 1802 से प्रारंभ हुआ।

1801 कोलकाता के कॉसिपुर में गन कैरिज एजेंसी (वर्तमान में गन एंड शेल फैक्टरी, कॉसिपुर) की स्थापना हुई और उत्पादन 18 मार्च, 1802 से प्रारंभ हुआ।

1869 एम्युनिशन फैक्टरी खड़की 16 दिसंबर 1869 को लघु शस्त्र निर्माण इकाई के रूप में अस्तित्व में आई।

1869 एम्युनिशन फैक्टरी खड़की 16 दिसंबर 1869 को लघु शस्त्र निर्माण इकाई के रूप में अस्तित्व में आई।

1904 नीलगिरि, तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित कॉर्डाइट फैक्टरी, अरुवनकाडु की स्थापना वर्ष 1904 में हुई।

1904 नीलगिरि, तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित कॉर्डाइट फैक्टरी, अरुवनकाडु की स्थापना वर्ष 1904 में हुई।

1940 हाई एक्सप्लोसिव्स फैक्टरी, खड़की, पुणे का शिलान्यास 11 जनवरी 1940 को हुआ और उत्पादन 1942 से प्रारंभ हुआ।

1940 हाई एक्सप्लोसिव्स फैक्टरी, खड़की, पुणे का शिलान्यास 11 जनवरी 1940 को हुआ और उत्पादन 1942 से प्रारंभ हुआ।

1942 आयुध निर्माणी खमरिया की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1943 में मित्र सेनाओं की गोला-बारूद आवश्यकता पूरी करने के लिए ईस्टर्न ग्रुप प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में की गई।

1942 आयुध निर्माणी खमरिया की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1943 में मित्र सेनाओं की गोला-बारूद आवश्यकता पूरी करने के लिए ईस्टर्न ग्रुप प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में की गई।

1964 आयुध निर्माणी चांदा परियोजना वर्ष 1964 में स्वीकृत हुई और प्रारंभिक उत्पादन 1970 में प्रारंभ हुआ।

1964 आयुध निर्माणी चांदा परियोजना वर्ष 1964 में स्वीकृत हुई और प्रारंभिक उत्पादन 1970 में प्रारंभ हुआ।

1964 ओएफवी की स्थापना 1964 में चीनी आक्रमण के तुरंत बाद मुख्य रूप से 7.62 मिमी गोला-बारूद के निर्माण के लिए की गई, ताकि 0.303 इंच कारतूसों का स्थान लिया जा सके, जो तब तक भारतीय सेना का प्राथमिक गोला-बारूद था।

1964 ओएफवी की स्थापना 1964 में चीनी आक्रमण के तुरंत बाद मुख्य रूप से 7.62 मिमी गोला-बारूद के निर्माण के लिए की गई, ताकि 0.303 इंच कारतूसों का स्थान लिया जा सके, जो तब तक भारतीय सेना का प्राथमिक गोला-बारूद था।

1980 इस कारखाने की स्थापना प्रारंभ में 1980 के दशक के उत्तरार्ध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की एक इकाई के रूप में अन्य सरकारी रक्षा एजेंसियों और कुछ विदेशी साझेदारों के सहयोग से हुई। उत्पाद का पूर्ण विकास पूरा होने के बाद कारखाना आयुध निर्माणी बोर्ड को सौंप दिया गया।

1980 इस कारखाने की स्थापना प्रारंभ में 1980 के दशक के उत्तरार्ध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की एक इकाई के रूप में अन्य सरकारी रक्षा एजेंसियों और कुछ विदेशी साझेदारों के सहयोग से हुई। उत्पाद का पूर्ण विकास पूरा होने के बाद कारखाना आयुध निर्माणी बोर्ड को सौंप दिया गया।

1984 आयुध निर्माणी बड़माल — इस कारखाने का शिलान्यास 29 अक्टूबर 1984 को रखा गया।

1984 आयुध निर्माणी बड़माल — इस कारखाने का शिलान्यास 29 अक्टूबर 1984 को रखा गया।

2001 आयुध निर्माणी नालंदा परियोजना 29.11.2001 को इस उद्देश्य से स्वीकृत हुई कि 155 मिमी आर्टिलरी गन के लिए बाई-मॉड्यूलर प्रोपेलेंट निर्माण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक स्थापित की जाए।

2001 आयुध निर्माणी नालंदा परियोजना 29.11.2001 को इस उद्देश्य से स्वीकृत हुई कि 155 मिमी आर्टिलरी गन के लिए बाई-मॉड्यूलर प्रोपेलेंट निर्माण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक स्थापित की जाए।

2021 एमआईएल की स्थापना 1 अक्टूबर 2021 को हुई और इसने अपना व्यावसायिक कार्य प्रारंभ किया।

2021 एमआईएल की स्थापना 1 अक्टूबर 2021 को हुई और इसने अपना व्यावसायिक कार्य प्रारंभ किया।